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याद आती है |

चलते चलते यूँ ही जब दम टूट जाता है
तुम्हारे हाथों की मेहंदी कढ़ाई याद आती है |

दुकानें बिखरी हैं सारी , कहीं अब जी नहीं लगता
तुम्हारे शहर की मीठी ठंढाई याद आती है ||

सब कुछ ठीक ठाक होना ,इश्क़ में अच्छा नहीं लगता
तुम्हारी पिछले बरस की रुसवाई याद आती है ||

एक शहर साथ चलता है , फिर भी अकेले हैं
सारे शोर - शराबे में एक तन्हाई याद आती है ||

आसमां नीला है , टरक्वीज़ है या आसमानी है
वो रंगों वाली तुम्हारी लड़ाई याद आती है ||

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