
सबने मिलकर एक दूसरे के टी-शर्ट फाड़ दिए
पानी कीचड़ अबीर - सबीर :
अर्ध नग्न जुलूस निकला है
पुराने इश्क़ पे रंग चढ़ाने|
और फिर एक रस्म
सोप ,शैम्पू ,फेस वॉश
परत दर परत रंग उतारने का
.
खैर कुछ रंग चेहरे पे छप जाते हैं ;
इश्क़ के छीटों के माफिक दिलों पे जम जाते हैं |
उतारने से नहीं उतरते ,
उतारने से नहीं उतरते ||
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