Skip to main content

कमीज़


हर एक बार स्टेज पे उतरने से पहले 
तुम्हारे तोहफे के कमीज़ को डब्बे से निकलता हूँ 
उतरते चाँद के साथ , 
तुम्हारी अंगड़ाइयों को जीते जीते 
इस्त्री चलाता हूँ ;
की हर एक सिकन जाती रहे 
फिर भी वो हकीकत ,सराफत , और इश्क़ के छीटें बची रह जाए ||
एक मुख़्तसर सी बात है : मुझे तुमसे प्यार है ||

मुख़्तसर : In short 

Comments