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December Diary

नन्हें नन्हें पलकों से पनपे
नन्हें नन्हें ख्वाबों में
हंसी बड़ी खिल कर आती है
हलके गहरे पश्मीने में |

जितना तुम में हम गुजरे हैं
उतना हममें तुम ठहरी हो
जितना हँसे हैं उतना रोये हैं
हम अबके महीने में |

एक कश्मकश सी है आँखों में
एक उलझन सा खींचता है सीने में
बड़ी सयानी पहेली है
तुम संग मरने जीने  में |

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