Skip to main content

FEVER BLOG : कभी कभी यूँ भी होता है इश्क़ में

कभी कभी यूँ भी होता है इश्क़ में :
कुछ भी इश्क़ जैसा नहीं रहता | 
न कुछ कहने को होता है , 
न कोई सुनने को चश्मदीद ;
न कोई आहट , न दिल्लगी 
न कोई सरसराहट किसी के आने जाने की |
तब ये दीवारें , थोड़ी मुश्किल सी लगती है |
कुछ कुछ मुजरिम सा एहसास होता है |

कभी कभी यूँ भी होता है इश्क़ में :

 तबियत ज़ार ज़ार हो जाती है 
कुछ भी इश्क़ जैसा नहीं रहता || 

Comments

  1. vaah ustad...kya mst likhey ho. :)

    ReplyDelete
    Replies
    1. aapke chhatra chhaya mein seekh rahe hain ustaad

      Delete

Post a Comment