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साकी

कितने करार तोड़ आया हूँ , कोई तो हिसाब दे
लबों पे इतने रंज हैं साकी,कुछ तो जवाब दे ।।

रास नहीं आते अब परदों पे उतरते चढ़ते समीकरण
वो तितलियों के किस्से वाली गहरी नीली किताब दे ।।

ले ले सारे कस्मकश मेरे हिस्से की साकी
शीशे का एक गिलास दे, भींगते मौसम का ख़्वाब दे ।।

जिंदगी के सारे मकां पे लुट गया हूँ मैं
साकी ,मुझे आज तू अपने पसंद की शराब दे ।।

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