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चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों |

चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों |
चलो उस रास्ते को आखिरी सलाम कह दे हम ,
जहाँ से आशिकी और उम्र का सैलाब बहता था |
चलो अब अपने वास्ते
कोई अंजाम ढूंढे हम ;
चलो किसी और चेहरे में 
कोई पैगाम ढूंढे हम ;
चलो किसी धुंध कोहरे में
कोई मंजिल तलाशें हम ;
चलो ,की अश्क से धो कर
कोई ख्वाइश तराशें हम ;
चलो, की आम नगरी में
कोई सौगात ढूंढे हम ;
चलो, की आम बातों में
कोई नयी बात ढूंढे हम ;
चलो, की बिछड़े रातों में
कोई नयी रात ढूंढे हम :


चलो ,की बेजार लफ़्ज़ों में 
कोई मुलाकात ढूंढे हम :
चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों |

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